Kulwinder Singh
पंजाब में पेट्रोल-डीजल भरवाने वाले ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट से जुड़ा नया मामला सामने आया है। 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू होने की व्यवस्था के बाद पेट्रोल पंप डीलर्स ने केंद्र सरकार से ईंधन कारोबार को इस चार्ज से छूट देने की मांग की है।
चंडीगढ़/पंजाब। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नए UPI चार्जिंग सिस्टम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किया जाना है। हालांकि पेट्रोल और अन्य कुछ निर्धारित श्रेणियों के लिए सामान्य प्रतिशत आधारित MDR के बजाय ₹5 का फ्लैट शुल्क निर्धारित किया गया है।
इस व्यवस्था को लेकर पंजाब के पेट्रोल पंप डीलर्स ने चिंता जताई है। डीलर्स का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री में ₹2,000 से अधिक के भुगतान आम हैं और बड़ी संख्या में ग्राहक UPI के जरिए भुगतान करते हैं। ऐसे में प्रत्येक पात्र ट्रांजैक्शन पर लगने वाला शुल्क पेट्रोल पंप संचालकों के लिए अतिरिक्त लागत बन सकता है।
केंद्र सरकार से छूट की मांग
पेट्रोलियम डीलर्स के संगठनों ने केंद्र सरकार से पेट्रोल पंपों को UPI से जुड़े MDR और अन्य संबंधित ट्रांजैक्शन शुल्क से छूट देने की मांग की है। ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
डीलर्स का तर्क है कि पेट्रोलियम रिटेल का कारोबार दूसरे सामान्य खुदरा कारोबार से अलग है। ईंधन की कीमतें और डीलर्स के मार्जिन एक निर्धारित व्यवस्था के तहत चलते हैं। ऐसे में अतिरिक्त डिजिटल पेमेंट लागत को अपने स्तर पर वहन करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
पंजाब में क्या स्थिति है?
पंजाब में भी पेट्रोल पंप डीलर्स इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने अपनी मांग रखने की तैयारी में हैं। मोहाली पेट्रोलियम डीलर्स के प्रतिनिधियों ने कहा है कि बड़ी संख्या में ग्राहक, खासकर वाहन और ट्रक चालक, ईंधन का भुगतान UPI से करते हैं। डीलर्स का कहना है कि अगर उन्हें हर ₹2,000 से अधिक के फ्यूल ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो इसका असर उनके सीमित मार्जिन पर पड़ेगा।
कुछ डीलर्स ने यह भी संकेत दिया है कि यदि पेट्रोल पंपों को इस शुल्क से राहत नहीं मिलती तो वे ₹2,000 से अधिक की UPI पेमेंट स्वीकार करने के बजाय कैश या अन्य भुगतान माध्यमों को प्राथमिकता दे सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इसे सभी पेट्रोल पंपों पर लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
नए नियम का सीधा मतलब यह नहीं है कि 15 अक्टूबर से पूरे देश में ₹2,000 से ज्यादा की UPI पेमेंट बंद हो जाएगी। शुल्क मुख्य रूप से मर्चेंट को मिलने वाली पात्र UPI पेमेंट पर लागू होगा।
ईंधन क्षेत्र के लिए ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि इस शुल्क को ग्राहकों पर अलग से डालने की अनुमति नहीं होगी।
लेकिन अगर कोई पेट्रोल पंप संचालक अतिरिक्त लागत से बचने के लिए बड़ी UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करता, तो ग्राहक को कैश या किसी दूसरे भुगतान माध्यम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। यही वजह है कि डीलर्स संगठन इस व्यवस्था में पेट्रोल पंपों के लिए अलग छूट की मांग कर रहे हैं।
UPI चार्ज का नया सिस्टम क्या है?
NPCI की नई व्यवस्था के अनुसार, सामान्य मर्चेंट कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि कुछ निर्धारित क्षेत्रों, जिनमें फ्यूल भी शामिल है, उनके लिए ₹5 का फ्लैट शुल्क रखा गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के सामान्य पात्र ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
यह बदलाव 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला है। फिलहाल पेट्रोल पंप डीलर्स की मांग है कि ईंधन की बिक्री को इस शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा जाए।
डीलर्स और सरकार के बीच आगे की बातचीत अहम
पेट्रोल पंप डीलर्स का कहना है कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के बाद अब उस पर अतिरिक्त लागत लगने से पेट्रोलियम कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ सरकार और NPCI की नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में शुल्क व्यवस्था लागू करना है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार पेट्रोल पंप डीलर्स की मांग पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल मामला बातचीत और मांग के स्तर पर है और ₹2,000 से अधिक की UPI पेमेंट पर पेट्रोल पंपों में देशव्यापी रोक लागू नहीं हुई है।





