दुनिया भर में इन दिनों एक ही खबर की चर्चा है – अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग आखिरकार थम गई है। 107 दिन तक चले इस टकराव के बाद अब दोनों देशों ने शांति समझौते पर सहमति बना ली है, और इसका एलान खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया।
ट्रंप ने अपने पसंदीदा प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है और सभी को बधाई । इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया होर्मुज स्ट्रेट को टोल-फ्री खोलने की अनुमति दे दी गई है और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तुरंत हटाई जा रही है
अब बात आती है उस लाइन की, जिसने सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा मज़े लिए ट्रंप ने दुनिया भर के जहाजों को सीधा “इंजन चालू करने” का मैसेज दे दिया। यानी, अब तेल के टैंकर रुकेंगे नहीं, बल्कि फुल स्पीड में दौड़ेंगे।
आखिर हुआ क्या है इस समझौते में?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच पहले एक MoU यानी समझौता-पत्र पर सहमति बनी है, जिसमें साफ कहा गया है कि हर मोर्चे पर जंग तुरंत रुकेगी, ईरान पर लगा नेवल ब्लॉकेड हटेगा, और होर्मुज स्ट्रेट को धीरे-धीरे पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून यानी शुक्रवार को होंगे, और साइन होने के 30 दिनों के भीतर होर्मुज पूरी तरह से खुल जाएगा
सबसे दिलचस्प बात ये है कि इस डील में पैसों का भी बड़ा खेल है। ईरान के फ्रीज किए गए कुल 24 बिलियन डॉलर में से 12 बिलियन डॉलर को लेकर भी बात बनी है यानी आधा अमाउंट सीधा वापसी की लाइन में है।
इसके अलावा, ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स और उनसे जुड़े एक्सपोर्ट्स पर लगे प्रतिबंध भी सस्पेंड किए जाएंगे यानी सीधी बात – ईरान का तेल कारोबार फिर से पटरी पर लौटने की तैयारी में है।
तेल के दाम पर क्या असर?
जैसे ही ये खबर आई, ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल मच गई। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक माना जाता है, और इसके खुलने की खबर से सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता दिख रहा है दाम नीचे की तरफ खिसक रहे हैं।
भारत के लिए क्या मतलब?
इस पूरे मामले पर भारत का रिएक्शन भी आ गया है। पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक शांति समझौते का स्वागत किया है जाहिर बात है, होर्मुज स्ट्रेट खुलने का सीधा फायदा भारत जैसे देशों को मिलेगा, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगाते हैं।
हालांकि, हर तरफ खुशी का माहौल नहीं है। इस समझौते से इजराइल नाराज़ बताया जा रहा है तो वहीं ईरान की तरफ से भी अपनी प्रतिक्रिया दी जा चुकी है।
कुल मिलाकर, 100 से ज्यादा दिनों की जंग के बाद अब उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट में शांति लौटेगी और दुनिया भर के तेल टैंकर बिना किसी डर के अपना सफर शुरू कर पाएंगे। अब देखना ये होगा कि 19 जून को होने वाले हस्ताक्षर के बाद हालात असल में कितने बदलते हैं।
Senior journalist Kulwinder singh
ProPunjabNews
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