सुबह की शुरुआत होती है चाय के कप से, और चाय में जो दूध मिलता है, वो भी एक ड्राइवर लेकर आया होता है। जो सब्ज़ी आपकी थाली में पहुंचती है, वो भी एक ड्राइवर की वजह से पहुंचती है। स्कूल जाने वाले बच्चे, ऑफिस जाने वाले लोग, बाज़ार से सामान, दवाइयां, राशन हर चीज़ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम कोई न कोई ड्राइवर ही करता है। फिर भी, जब हम अपनी रोज़ की ज़िंदगी के बारे में सोचते हैं, तो शायद ही कभी ड्राइवर के बारे में सोचते हैं।
चाहे बस का ड्राइवर हो, ट्रक चलाने वाला हो, टैक्सी या ऑटो वाला हो, या फिर हवाई जहाज़ और ट्रेन चलाने वाला पायलट हर एक का काम बहुत बड़ा और ज़िम्मेदारी से भरा है। एक बस में रोज़ सैकड़ों लोग सफर करते हैं। हर यात्री, बिना सोचे-समझे, अपनी जान उस ड्राइवर के हाथों में सौंप देता है जो स्टीयरिंग व्हील पर बैठा होता है। ये भरोसा छोटी बात नहीं है। एक छोटी सी गलती, एक पल की लापरवाही, बहुत बड़ा नुकसान कर सकती है। इसलिए हर ड्राइवर को हर पल सतर्क रहना पड़ता है चाहे रात हो या दिन, बारिश हो या धूप, थकान हो या नींद।
लेकिन सवाल यह है कि समाज में ड्राइवर को किस नज़र से देखा जाता है? सच्चाई यह है कि ज़्यादातर लोग इस काम को छोटा या मामूली समझते हैं। बस में बैठकर लोग आराम से अपनी मंज़िल तक पहुंच जाते हैं, सामान सही समय पर सही जगह पहुंच जाता है, लेकिन जिस इंसान की मेहनत और एकाग्रता से यह सब मुमकिन होता है, उसकी तरफ बहुत कम लोगों का ध्यान जाता है। कई बार तो ड्राइवर को सिर्फ एक “नौकर” या “ड्राइवर भाई” कहकर ही बुलाया जाता है, उनकी मेहनत को कोई खास इज़्ज़त नहीं दी जाती।
जबकि सच यह है कि ड्राइवर का काम सिर्फ गाड़ी चलाना नहीं है। उन्हें रास्तों की जानकारी रखनी पड़ती है, गाड़ी की हालत का ध्यान रखना पड़ता है, ट्रैफिक के नियमों का पालन करना पड़ता है, और सबसे बड़ी बात हर यात्री और हर सामान की सुरक्षा का ज़िम्मा उनके कंधों पर होता है। घर से दूर रहना, लंबे सफर, अनियमित खाना-पीना, कम सोना यह सब एक ड्राइवर की रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा है। फिर भी, समाज में उन्हें वो सम्मान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए।
अब बात करते हैं ट्रांसपोर्ट के मालिकों की। जो लोग बस, ट्रक या टैक्सी के बिज़नेस में हैं, वो जानते हैं कि एक अच्छा और भरोसेमंद ड्राइवर मिलना कितना मुश्किल है। एक ड्राइवर सिर्फ गाड़ी नहीं चलाता, बल्कि पूरे बिज़नेस की पहचान भी बनाता या बिगाड़ता है। अगर ड्राइवर समय का पाबंद है, गाड़ी को अच्छे से चलाता है, और यात्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करता है, तो उस बिज़नेस की साख बढ़ती है। इसीलिए मालिक हमेशा अनुभवी और ईमानदार ड्राइवर की तलाश में रहते हैं, और जब उन्हें ऐसा ड्राइवर मिल जाता है, तो वो उसे अपने बिज़नेस का अहम हिस्सा मानते हैं।
लेकिन सिर्फ मालिकों के भरोसे से बात पूरी नहीं होती। समाज को भी अपनी सोच बदलने की ज़रूरत है। ड्राइवर कोई छोटा काम नहीं है यह एक ऐसी ज़िम्मेदारी है जिस पर हज़ारों-लाखों लोगों की रोज़ाना ज़िंदगी टिकी होती है। अगर एक दिन सारे ड्राइवर काम बंद कर दें तो सोचिए क्या होगा। दूध नहीं पहुंचेगा, सब्ज़ी नहीं आएगी स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे फंस जाएंगे अस्पतालों में दवाइयां नहीं पहुंचेंगी, और पूरा शहर थम जाएगा। यही असली ताकत है एक ड्राइवर की वो दिखता कम है पर उसका काम हर जगह है।
इसलिए अगली बार जब आप बस में सफर करें टैक्सी में बैठें, या सुबह दूध-सब्ज़ी अपने घर पर पाएं, तो एक पल के लिए उस ड्राइवर को याद करें जिसकी वजह से यह सब मुमकिन हुआ। एक छोटी सी मुस्कान, एक “धन्यवाद” का शब्द, या बस उनकी मेहनत को समझना यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान हो सकता है। समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस मेहनतकश तबके को वो इज़्ज़त दें, जिसके वो सच में हकदार हैं।
कुलविंदर सिंह, ProPunjabNews








